STORYMIRROR

Kumar Kishan

Abstract

4  

Kumar Kishan

Abstract

मेरा भारत

मेरा भारत

1 min
451

एक बार मैंने एक स्वप्न देखा

स्वप्न में भारत माँ को देखा

जो आसूँ बहा रही थी

नत नयन और मस्तक झुकाए खड़ी थी


बड़ी ही उनकी विचित्र स्थिति थी

मैं तो हैरान था

कशमकश स्थिति में था

आज, माँ को क्या हुआ है ?

क्यों, आसूँ बहा रही है ?


कुछ तो बात हुआ है

जो माँ मुझसे छुपा रही है

माँ से मैंने पूछा

क्यों, आसूँ बहा रही हो ?


कौन सी विकट परिस्थितियों

से आप गुजर रही है ?

मेरी बात सुनकर

भारत माता बोली।


बेटा, आज मेरे संतान

कर्तव्यहीन और

आलसी हो गए हैं

भ्रष्टाचार और गरीबी

अब मेरे चिरसँगी हो गए हैं


जिससे मैं बड़ी ही चिंतित हूँ

एकाएक मेरा स्वप्न टूटा

जैसे मैं नींद से जागा

स्वप्न की बात आज सच

हो रही है, मानो


जैसे भारतमाता

आसूँ बहा रही है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract