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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance

मदहोश

मदहोश

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ज़बसे तुझको देखा है 

मेरे होश उड़ गये हैं, 

तेरे हुस्न की महक से, 

हम बेहाल हो गये हैंं।

नज़र तेरी हैं कातिल,

हम घायल बन गये हैं, 

गुलाबी होंठ देखकर,

हम भँवरे बन गये हैं।

उड़ती झुल्फ़े देखकर,

हम तो लहरा गये हैं।

चेहरे की मुस्कान देखकर,

हम दिवाने बन गये हैं।

तेरी मस्त अदाओं से,

हम मस्ती में झूम गये हैं।

पायल की छननन छूम से,

हम बाँवरे बन गये हैं।

मेरे ख्वाबोंbकी मल्लिका तुम,

हम ईश्क में खो गये हैं,

"मुरली" बांहो में आज़ा,

हम मदहोश बन गये हैं।



साहित्याला गुण द्या
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