Nehal Panchal
Romance
मौसम ने भी रुख बदला,
जब से उसने तुम्हें देखा,
हवाएं भी पूछने लगी,
ऐसा ना कभी पहले देखा,
भीगाता रहा मौसम सब कुछ,
मगर इस दिल को भीगते हुए
पहली बार देखा,
शायद इसीलिए...
मौसम में भी आज मैंने तुम्हें देखा...।
बेड़ियाँ
अमर
कारवां
रूह में बसा इ...
चलती जा
मौसम
कभी हमको हंसाती है कभी ये ही रूलाती है कभी हमको हंसाती है कभी ये ही रूलाती है
स्वर्ग लोक की थी वो क्रांति, या थी मन की स्वप्नरूपी भ्रांति। स्वर्ग लोक की थी वो क्रांति, या थी मन की स्वप्नरूपी भ्रांति।
तुम साथ हो तो हर दिन खास है, वरना हर लम्हा बस एक एहसास है। तुम साथ हो तो हर दिन खास है, वरना हर लम्हा बस एक एहसास है।
हर मोड़ पर रुक कर सोचा, कहाँ गलत हो गया हर मोड़ पर रुक कर सोचा, कहाँ गलत हो गया
श्रंगार रस की कविता में कविता का सौंदर्य तुम । श्रंगार रस की कविता में कविता का सौंदर्य तुम ।
प्यार साल में दो बार, झगड़ा हर दिन लगातार, मासूम से मेरे दिल को वो तड़पाता बहुत है, प्यार साल में दो बार, झगड़ा हर दिन लगातार, मासूम से मेरे दिल को वो तड़पाता ब...
लोग कहते होंगे तुम्हें खूबसूरत किताब लोग कहते होंगे तुम्हें खूबसूरत किताब
तू ही है जो हर दर्द को, अपनी गोद में भर लेती है, तू ही है जो हर दर्द को, अपनी गोद में भर लेती है,
कभी लौट आ, फिर से वो सफर हम शुरू करेंगे। कभी लौट आ, फिर से वो सफर हम शुरू करेंगे।
या बीच कहीं ठहर जाएगी पानी के अभाव से या बीच कहीं ठहर जाएगी पानी के अभाव से
पर सोना हमेशा तपता रहे यह बेमतलब होता है पर सोना हमेशा तपता रहे यह बेमतलब होता है
कितनी ही शामें बीत गईं, एक ही टेबल पर, दो अलग-अलग प्याले रखते हुए, कितनी ही शामें बीत गईं, एक ही टेबल पर, दो अलग-अलग प्याले रखते हुए,
किसी की हँसी में खुशी है, ये दुनिया को बताना, किसी की हँसी में खुशी है, ये दुनिया को बताना,
मेरे दिल और दिमाग में बस तुम ही हो मेरे दिल और दिमाग में बस तुम ही हो
इसीलिए मैंने इसे राज़ रखने की कसम खाई है। इसीलिए मैंने इसे राज़ रखने की कसम खाई है।
क्या कोई मेरी इस पीड़ा को पहचानेगा कितनी बार प्रभु से विनती करती , क्या कोई मेरी इस पीड़ा को पहचानेगा कितनी बार प्रभु से विनती करती ,
इधर उधर की बात शनै: शनै: फिर प्यार की बात इधर उधर की बात शनै: शनै: फिर प्यार की बात
या यूं ही बहाने से दूर रहकर, मेरे दिल में उतर जाना था? या यूं ही बहाने से दूर रहकर, मेरे दिल में उतर जाना था?
मुस्कानों से कहर बरपाती हर बात उसकी निराली थी मुस्कानों से कहर बरपाती हर बात उसकी निराली थी
तुम जग की पालनहार-सी, मैं भक्त तुम्हारा लाचार प्रिये, तुम जग की पालनहार-सी, मैं भक्त तुम्हारा लाचार प्रिये,