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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Action Inspirational

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Action Inspirational

मौसम की अनिश्चितता अर्थात दुःखो का पहाड़ है

मौसम की अनिश्चितता अर्थात दुःखो का पहाड़ है

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आज सभी का व्यस्तता भरी जिंदगी है 

कण कण में प्रभु जी भी समाया हुआ है 

लोग कहते है एक नया इतिहास बनायेंगे 

पक्की सड़कें, पक्की मकान बनाने की होड़ है


लेकिन सुन लो गौर से ओ दुनिया वालों 

मौसम की अनिश्चितता अर्थात दुःखों का पहाड़ है।

जब हम पूछते है हर एक व्यक्ति से 

क्या तुम्हारे पास थोड़ा सा वक्त है


तुरंत ही जवाब मिल जायेगा सज्जनों

मेरे पास जरा सा भी वक्त नहीं है 

पीछे का इतिहास पलटकर कोई देखता कहां है 

मौसम की अनिश्चितता अर्थात दुःखों का पहाड़ है।


दुनिया वाले इस बात से क्यों हो रहे है बेखबर

मौसम पर ही आधारित है हमारा जीवन 

कितना सुंदर और मनोहर है प्रकृति का आँचल 

पेड़ो, फूलों, नदी, नालें, पहाड़ों से सजा हुआ है 


अगले पल का तो किसी को कोई पता नहीं है 

मौसम की अनिश्चितता अर्थात दुःखों का पहाड़ है।

सुर दुर्लभ मानव तन हमने पाया है 

हमारा मन मस्तिष्क ज्ञान ज्योति से उजियारा है 


भला इंसान बनने की चाहत है तो बन जाओ

पर मन में इंसानियत भी तो रखो सज्जनों

प्रकृति के स्वरूप के साथ खिलवाड़ न कीजिए 

मौसम की अनिश्चितता अर्थात दुःखों का पहाड़ है।




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