मैं
मैं
जो नहीं थी कभी वो बन गई गई हूं मैं
इस कदर ना जाने किस से रंग में रंग गई हूं मैं
बस एक तेरे जाने से देख न कितना बदल गई हुं मैं
कहा़ तेरे सिवा सब व्यर्थ था पर कितना संभल गई हुं मैं
तू अब ज़रूरी नही तेरा अस्तित्व नहीं ये सच हैं
खुश हूं मैं के तुझसे निकल गई ही मैं
बस एक एहसान करना की न हो अब दीदार तेरा
क्योंकि तू अनजान है की कितना बदल गई हूं मैं।
