मैं तेरी दीवानी
मैं तेरी दीवानी
प्रेम प्यार या प्रीत कहो
साजन सखा या मनमीत कहो
अर्थ सभी के एक
प्यार बांधे रिश्ते अनेक
आज ढूंढे एक प्रीत को
आओ बरसाने चलें
दो नयन डूबे एक दूजे में
राधा श्याम देखो नभ तले
ये प्रीत कि है महिमा कैसी
ईश्वर प्रेम की गरिमा कैसी
ढूंढे तुझे ओ मनमोहन
बनके जोगन,
राजकुारी मीरा जैसी
पीला पटका कृष्ण है काया
घूंघर बाल का नयनों पर साया
मोर पंख संग मधुर बांसुरिया
राधा मीरा पर क्या रोग यह छाया
नित पूजन करे तेरा रूखमणी
मौन क्यों बैठे हो नीलमणि
तेरे सौंदर्य का प्रबल रूप
बनाए प्रेम निर्धन को भी धनी
प्रेम रोग में सजी मैं तेरे
काया ना सही तेरी छाया ही अपनी मानी
चरणो की माटी ही समझ
अपनालो मुझे ओ वृंदावन बिहारी।।
