मैं जीवन का भावार्थ लिखूँगी
मैं जीवन का भावार्थ लिखूँगी
जो लिखूँगी, यथार्थ लिखूँगी.....
मैं, जीवन का भावार्थ लिखूँगी....
वर्तमान में व्याप्त व्याधि का....
सम्पूरण चरितार्थ लिखूँगी......
नियति ने यह कैसी चाल चली....
समय के रथ पर काल सवार....
योद्धा भी सब हार गए हैं.......
मार न पाया कोई हथियार.....
बन के सारथी कान्हा आओ.....
हर योद्धा को पार्थ लिखूँगी....
जो लिखूँगी, यथार्थ लिखूँगी.....
मैं,जीवन का भावार्थ लिखूँगी....
रावण से ज्यादा ताकतवर......
कौन हवा में है स्वच्छंद ?.......
कैसी है यह लक्ष्मण रेखा.......
जिसमें बंध कर राम है बंद ?.....
युग के इस परिवर्तन को........
नियति का निहितार्थ लिखूँगी......
जो लिखूँगी, यथार्थ लिखूँगी......
मैं,जीवन का भावार्थ लिखूँगी.....
देवव्रत फिर से निकला है......
करने को आखेट यहांँ.....
उड़ते-फिरते नभ के पंछी......
खाता उनको, भरपेट यहाँ......
जग-तारक, संताप-निवारक.....
हर योगी को सिद्धार्थ लिखूँगी....
जो लिखूँगी, यथार्थ लिखूँगी.....
मैं,जीवन का भावार्थ लिखूँगी.....
मानव की सेवा से बढ़ कर.....
बोलो, जग में क्या है काम ?....
हाथ बढ़ा कर आगे आओ......
हाथों को लो तुम भी थाम......
इन हाथों को, हाथ जोड़ कर.....
सौ-सौ मैं कृतार्थ लिखूँगी......
जो लिखूँगी, यथार्थ लिखूँगी.....
मैं,जीवन का भावार्थ लिखूँगी....
