STORYMIRROR

Priya Bahrath

Tragedy

3  

Priya Bahrath

Tragedy

मैं बेहया !

मैं बेहया !

1 min
349

समाज में एक औरत को

उसके नाम के अलावा

और कई नामों से

संबोधित किया जाता है।


उसका परिवार, उसके

पड़ोसी और यहाँ तक कि

कुछ ऐसे लोग जिन्हें वो

जानती भी नहीं है वो भी

उसे कभी बेशर्म तो कभी

बेहया कह देते है।


ऐसे संबोधन को सुन

पहले तो यह औरत बढ़ा

रूठ जाती थी, उदास हो

जाती थी पर मेरी कविता

की यह औरत इन सभी

नामों को स्वीकार करती

चली जाती है।

अपना नाम बेहया ही

बताती है !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy