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PANKAJ BARMAN

Tragedy

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PANKAJ BARMAN

Tragedy

मैं और मेरी ईर्ष्या

मैं और मेरी ईर्ष्या

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मेरे दिन कि शुरूआत, होती है ईर्ष्या से

शाम ढलने के साथ,खत्म होता दिन ईर्ष्या से।

इस ईर्ष्या के कारण मैने,बहुत खोया,कुछ पाया भी,

ना अपने,ना रहे दोस्त सारे,रिश्ते दूर हुए सिर्फ ईर्ष्या से

तन-मन विचलित, सारी दुनिया विरानी हूई सिर्फ ईर्ष्या से,

खुद कि जलन,खुद कि व्यथा के कारण,दूर हुआ मै सबसे।

भलीभांति जानता भी हूं,और समझता भी हूं इस ईर्ष्या को,

इस हीनता के उदगम् दिल को,खुद से बचाता भी हूं ईर्ष्या से।

आओ प्रढ़ करे हम सब मिलकर,पाए निजात ईर्ष्या से,

खुद में एक परिवर्तन करके,दिल से खत्म करे ईर्ष्या भावना को।


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