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PANKAJ BARMAN

Others

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PANKAJ BARMAN

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देखो बसंत आ रहा

देखो बसंत आ रहा

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पौधों पे नव पुष्प खिल रहे हैं।

और पेड़ों पर बौर लग रहे हैं।।

चारों तरफ हरियाली छा रही ।

देखो बसंत का आगाज हो रहा।।

खेतों में सरसों के फूल खिल रहे।

ओर डाली पर कोयल बोल रही।।

हवाओं के झोंकों से तन मन डोल रहा।

प्रकृति का संगीत मन में रस घोल रहा।।

रिमझिम रिमझिम पानी की बूंदें गिर रही।

आंखों में प्यार भर के आसमान भी गरज रहा।।

बसंत के आगमन से पतझड़ का अंत हो रहा।

हरियाली के छाने से घर आंगन सुंदर लग रहा।।



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