मैं अकेला नहीं रोता
मैं अकेला नहीं रोता
मैं अकेला नहीं रोता मेरे संग
पतझड़ और वीराने रोते हैं।
मेरे घायल गीत भी रोते हैं,
मेरे घाव पूराने रोते हैं।
आंसू छिपाने को गीतों का
बहाना ढुंढता हूं,
अपना संग निभाने को
वीराना ढूंढता हूं।
सुख में सब साथ देते हैं,
दु:ख का साथी ढुंढता हूं मयखाना ।
मन की बगिया में सुन्दर फूल
खिलाए थे मैंने, लेकिन जग कहता
मुझको फूल नहीं वो शूल थे,
मैंने प्रीत के बदले भावों का सम्मान
चाहा । देने लगा जग भिक्षा
मुझको मैंने तो प्रतिदान चाहा।
जंग कहता मुझको,
मैंने सब अपने सुख खो दिए
मेरी ही गल्ती से मेरे
भाग्य सितारे हो गए।
जग अपनी त्रुटियों को मेरी
गल्ती बतलाता है प्रीत के
बदले प्रीत ना देकर
मेरा उपहास उड़ाता है।
कामना का दीप बुझे गया मेरा,
भावना की लौ ना बुझाता हूं
साधना का गीत गाता हूं,
प्रणय के पथ पर बस चलता जाता हूं।
प्रणय के पथ की सीमा नहीं,
करने को सुगन्धित, अर्चना
के पुष्प लुटाता हूं,
स्मृति का दीप जला प्रणय के पथ को।
आलोकित करता जाता हूं,
साथ अपने रोने को गीत पुराने गाता हूं।
