Smita Rai
Classics
दूर से आती अनजानी
कोई आहट पाकर
उड़ जाने वाली कबूतरी
आज निडर बैठी है
एक टक मुझे ताकती
आज उड़ना नहीं चाहती
आज वो डरना नहीं चाहती
उसने अंडे दिए हैं,
आज वो कबूतरी "मां" है...।
मातृत्व
आसमां
नारी के मुख स...
स्वीकार कर ले अरु, वक़्त का परिवर्तन ! स्वीकार कर ले अरु, वक़्त का परिवर्तन !
हर समस्या में ही उसका समाधान रहता सदा। हर समस्या में ही उसका समाधान रहता सदा।
गण नाथ पशुपति सूक्ष्मतनु गिरि सोम शिव भव भूषणं।। गण नाथ पशुपति सूक्ष्मतनु गिरि सोम शिव भव भूषणं।।
साहस से आगे बढ़ो बन जाओ पूर्णिमा के चांद समान।। साहस से आगे बढ़ो बन जाओ पूर्णिमा के चांद समान।।
अंततःरात के हाशिए से सुबह बालअरुण जनम लेंगे ! अंततःरात के हाशिए से सुबह बालअरुण जनम लेंगे !
भीमराव की देन, घरों में है खुशहाली। करो भीम को नमन, उन्ही से है दीवाली। भीमराव की देन, घरों में है खुशहाली। करो भीम को नमन, उन्ही से है दीवाली।
पूरे वर्ष निश्चिन्त रहें, हमारे राखे देवी लाज ! पूरे वर्ष निश्चिन्त रहें, हमारे राखे देवी लाज !
कुछ पल जिएं खुद के लिए व अपने सपने के लिए ! कुछ पल जिएं खुद के लिए व अपने सपने के लिए !
क्योंकि आज भी आँखों से दर्द टपक रहा है आहिस्ता आहिस्ता। पढते रहिये आपका अपना दोस्त। क्योंकि आज भी आँखों से दर्द टपक रहा है आहिस्ता आहिस्ता। पढते रहिये आपका अपना ...
फुलझड़ी की कमान यहीं तो हैं मेरा भारत महान। फुलझड़ी की कमान यहीं तो हैं मेरा भारत महान।
खुशी से बीता लोपता नही कल हो ना हो। खुशी से बीता लोपता नही कल हो ना हो।
इश्क़ दर्दे सर है, बस ये जान लो, ज्ञानेश्वर। इसपे अब मैं गुफ्तगू, इससे ज़्यादा, क्या क इश्क़ दर्दे सर है, बस ये जान लो, ज्ञानेश्वर। इसपे अब मैं गुफ्तगू, इससे ज़्याद...
वहां एहसास होता है बेहद अपनेपन का ! वहां एहसास होता है बेहद अपनेपन का !
जीवन में नूतन आशा यह भर देती, मन का आँगन भी रोशन कर देती ! जीवन में नूतन आशा यह भर देती, मन का आँगन भी रोशन कर देती !
ना जाने कब प्यार के दीप, फिर से जल पाएगा। ना जाने कब प्यार के दीप, फिर से जल पाएगा।
जन्म जन्म हमारे इश्क की बात होती रहे। जन्म जन्म हमारे इश्क की बात होती रहे।
चल दिए समेट अपनी हस्ती छोड़ हमें पीछे सिसकते स्वजीता।। चल दिए समेट अपनी हस्ती छोड़ हमें पीछे सिसकते स्वजीता।।
तन मिट्टी का दीप है, मधुकर अदभुत मेल।। तन मिट्टी का दीप है, मधुकर अदभुत मेल।।
हे गोवर्धन, हे देवकी नंदन, सारा जग करता तुम्हारा बंदन ! हे गोवर्धन, हे देवकी नंदन, सारा जग करता तुम्हारा बंदन !