STORYMIRROR

Smita Rai

Classics

3  

Smita Rai

Classics

मातृत्व

मातृत्व

1 min
12.4K

दूर से आती अनजानी 

कोई आहट पाकर


उड़ जाने वाली कबूतरी

आज निडर बैठी है


एक टक मुझे ताकती

आज उड़ना नहीं चाहती


आज वो डरना नहीं चाहती

उसने अंडे दिए हैं, 


आज वो कबूतरी "मां" है...।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics