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Vinay Anthwal

Inspirational

4.3  

Vinay Anthwal

Inspirational

मातृभूमि

मातृभूमि

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264


मातृभूमि भारत है प्राण प्यारा भारत

आर्षभूमि भारत है देवभूमि भारत l

जननी हमारी भारत है कर्मभूमि भारत l

सदियों से ज्ञानगंगा रहती है इसमें बहती 

ऋषियों की गिरा यहाँ पर वेदों मे प्राण भरती l

हम भी प्रसून इसमें खिलते रहे हैं तबसे 

देवेश की ये रचना बनी मेदिनी है जबसे l

कुछ धूर्त हैं यहाँ पर अंक मे जो इसके पलते 

माता ये प्राण प्यारी इसको न माँ हैं कहते l

कृतघ्न मूढ़ जन ये ऐसे भी पल रहे हैं 

गोदी मे इसके कबसे जी भरके जी रहे हैं l

अवनि है सबसे प्यारी भारत हृदय है इसका 

सिंगारिया बना है परमेश भी तो जिसका l

सबसे पुनीत भारत है स्वर्ग सा ये भारत 

रमणीयतम है भारत है कुलीन भी ये भारत l

मातृभूमि भारत है प्राणप्यारा भारतl



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