ऐ दिल
ऐ दिल
ए दिल
ए दिल अब तू, समझदार बन जा
अब खुद ही तू,वफादार बन जा।
ये दुनिया बहुत भ्रामक है,
तू अपना ही दिलदार बन जा।
ए दिल, मत हिल
ये दुनिया किसी की नहीं है।
तू अपने काम से काम रख,
ये दुनिया किसी की सगी नहीं है।
आदिल मेरा दिल दिलदार तू है
तू अपना ही गुनहगार क्यों है?
ये दुनिया रंग बदलती है पल में,
तू इसका तलबगार क्यों है?
ए दिल तू सबके साथ घुलमिल
जीवन की बगिया में,सबके साथ हँस-मिल।
धोखा, झूठ, फरेब यहाँ है
तू अपनी राह से मत हिल।
आज की सच्चाई
अब समय कुछ पलों का है,
अचानक साँसों के रुकने का है।
क्या जाता है शुद्ध सरल होने में,
अब जीवन अंतिम क्षणों का है।
ये जीवन मधुर व्यवहार का है
ये समय सबके सत्कार का है।
क्यों किसी को दुःख दर्द देना,
ये जीवन तो उपकार का है।
