मासूमियत और वफादारी
मासूमियत और वफादारी
मासूमियत
और वफादारी
दोनों साथ -साथ चलते हैं
जिंदगी के
हर सफर को,
दोनों साथ -साथ
तय करते हैं
मासूमियत
और वफादारी
दोनों साथ साथ चलते हैं
विश्वास ही है
जो साथ लिए चलते हैं
उसी के दम पर ,
आगे-आगे बढ़ते हैं
डर कैसा ?
जिंदगी की,
तमाम मुश्किलें
आसानी से हल करते हैं
मासूमियत
और वफादारी
दोनों साथ -साथ चलते हैं
धोखे से नहीं,
जीतता इंसान
अपनी
चलाकियों से,
हार जाता है
बड़ी -बड़ी शक्तियां
जहां दफन हो गई
भू के गर्भ में,
सिर्फ मासूमियत
और वफादारी है
जो करामात कर जाती है
रास्ते कितने,
भी मुश्किल हो
चलते -चलते,
मंजिलें पा जाती हैं
मासूमियत,
और वफादारी
जिंदगी को,
जिंदगी बना जाती है
बड़ी-बड़ी मंजिलें भी
पलक झपकते ही,
पल में ही पा जाती है
मासूमियत और वफादारी
जिंदगी भर चलती है।
