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Sarita Saini

Abstract

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Sarita Saini

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मासूम थे बहुत

मासूम थे बहुत

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मासूम थे बहुत अब समझदार हो गए हैं,

अब तो ख़ुद ही हम कसूरवार हो गए हैं।


मासूमियत में कहाॅ समझ थी दुनियादारी की,

जबसे हुए हैं समझदार थोड़े लापरवाह हो गए हैं।


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