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माँ

माँ

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कभी डाँटा प्यार से, कभी मार भी दिया

मेरी माँ तूने मुझको कितना प्यार है दिया

पिता की मार पे वो पीछे छुपना याद है मुझे

क्या लिखूं मैं उस पे जिसने खुद लिखा मुझे।।


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