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Pulkit Arora

Abstract

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Pulkit Arora

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माँ

माँ

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मेरी हर टूटती नींद में

तुम ही जागती थी माँ।


मेरी किलकारी और सिसकी

फर्क समझती थी माँ।


आज न जाने शायद मैं बदल गया

पर कभी तू न बदली माँ।


तेरी जागती रातों को

कभी मैं न समझा। 


पर मेरी जागती रातों का

तुझे पता है माँ।


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