"माँ "
"माँ "
दिन -9
रंग,, शुद्धता और स्त्रीत्व का प्रतिनिधित्व कर्ता है।
कुदरत का अप्रतिम सृजन है माँ
मन्नत के धागों में बसी सभी के लिए एक उम्मीद, एक अभिलाषा, दुआ है माँ
बंजर धरा पर एक खिलखिलाता उपवन है माँ
एक अनुभूति, दृष्टि दोनों तुझसे
हर पल दर्शन को तरसे
आनंद का अतुलनीय धाम है माँ
अंधेरे में रोशनी की किरण है माँ
साफ दिल वाली निस्वार्थ प्रेम की प्रतिमा है माँ
करुणा से भरी अपना सर्वस्व न्यौछावर करती है माँ
परिवार का आधार शिला कहलाती है माँ
जब जीवन में ठोकर लगे तो सबसे पहले याद आती है माँ
सन्तान के खामोश दर्द के लिए एक मरहम है माँ
सन्तान की पहली गुरु, शिक्षा का आधार है माँ
सन्तान को आचरण, संस्कार देकर समाज में एक अच्छा इंसान बनाती है माँ
स्वयं भूखे रहकर पूरे परिवार का मनपसंद खाना बनाकर माँ अन्नपूर्णा कहलाती है माँ
बाहर से नारियल की तरह कठोर पर अंदर से नर्म हम पर प्रेम न्यौछावर करती है माँ
जीवन की तेज धूप में शीतल छांव है माँ
उसकी गोदी अदभुद प्यारी
खुशियों की तुम अनुपम क्यारी
तृप्त कर तन मन को स्वर्ग सा आभास कराती है माँ
संस्कार है तुमसे एक प्रेरणा आदर्श है माँ
सुन्दर मुस्कान से विजित होता जीवन संग्राम है माँ
तुम्हारे चरणों में सुख का सागर
आंचल तुम्हारा अमृत का गागर
शीतलता की आभा से अविरल देता मधुर पैगाम है माँ
हमारा वंदन समर्पित
उसके दिव्य आशीष से सुशोभित सुबह शाम है
सन्तान के लिए चारो धाम , पूजा स्थल है माँ
रिश्तों को बखूबी निभाना सिखाती हैं माँ
लफ्जों में बया नहीं किया जा सकता एसी सादगी भरी होती है माँ
दुःख सहकर अपना सर्वस्व न्यौछावर कर हम पर इनायत करती है माँ
दिल में हरदम ईश्वर की तरह रहती है माँ।
