माँ
माँ
"ओह मां" सदा है मुंह से निकलता ,
कोई दर्द अचानक जब है हमें सताता।
दुनिया के सब रिश्ते -नातों से अलग है,
माता का है सबसे अद्भुत सा ही नाता।
मां है पहली गुरु- परिवार पहली पाठशाला,
संस्कारों की छाप का पहला है असर डाला।
प्यार तो चाहत है इस दुनिया में हर किसी की,
स्वार्थी इस जगत में मां का प्यार सबसे निराला।
ईश्वर के आभारी हैं हम सब पाकर के उपहार,
इन अगणित उपहारों में सर्वश्रेष्ठ हैं हमको प्यार।
जग में निज रिश्ते देते हैं हमको तो बड़ा ही प्यार,
रिश्तों से मिले प्यार में बड़ा अनमोल है मां का प्यार।
खुशनसीब इस जग में हैं वे सब,
जिन्हें नसीब हुआ है मां का प्यार।
स्वर्ग मां के चरणों में है इस जग में,
मां तो ही है खुशियों का पूरा संसार।
