मां मुझे डर लगता है
मां मुझे डर लगता है
उन राहों से जहां अंधेरा होता है
उन गलियारे से जहा दरिंदो ने
डाला डेरा होता है
मां मुझे डर लगता है।
आज मै अकेले चलने से डरती हूँ
क्योंकि मै एक लड़की हूँ
कैसे घर से बाहर निकलूँ
मुझे समझ नहीं आता
कैसे किसी पर विश्वास करूँ
मुझे समझ नहीं आता
क्योंकि, मां मुझे डर लगता है।
पर फिर भी मुझे हर
डर से लड़ना आ गया है
जीवन मे आगे बढ़ना आ गया है
क्या करूँ मां तेरी बच्ची हूँ,
इसलिए इन सब से लड़ना आ गया है।
ना जाने कब यह समय बदलेगा
हर लड़की का ये डर मन से निकलेगा
बिना डर के जाना होगा
अंधेरे मे भी बिना डरे आना होगा
ओर कहना होगा
मां तू चिंता मत करना
मेरा आज बिना डरे घर आना होगा।
