माँ के सपने
माँ के सपने
वो स्कूल में मैन खुद रो रो कर
अपना एड्मिसन करवाया था,
ढाई साल के बच्चे को पढ़ने
का चस्का जो आया था,
मां की आंखों में एक गर्व दिखता था
इस बात को हर बार कहते,
और हर बार ये अहसास
कुछ करने की प्रेरणा देता था ।
आज भी एल्बम के पन्नों को पलटते है तो लगता है
माँ की आंखे दे रही है कुछ करने
का जज़्बा, कह रही है कुछ करने को
मेरे अंदर मैने उनके ख़्वाब जीते देखे हैं,
एक दफ़ा अनगिनत बार देखे है,
आज भी दिल टूटता है तो वो ख्वाब
खड़ा करते है फिर से चलने का हौसला देते है
अभी उनके सपनों के कुछ कदम और भी चलने हैं,
सीढ़ियों पर हूँ मंज़िल तलक पहुँचने में समय है।
