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Chitrarath Bhargava

Abstract

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Chitrarath Bhargava

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लुका छुपी

लुका छुपी

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ये चाँद जो बादलों के पीछे छुपता है,

कहना चाहता है मुझसे कुछ क्या?


ये जो परछाई मेरे चेहरे पर पड़ती है,

निशाँ छोड़ जाती है मेरे चेहरे पर क्या?


वर्तमान को प्रभावित करती

अतीत की परछाइयाँ।


सूरज की चमक पर हावी होता

चाँद का प्रतिबिंब।


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