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Kumar Gaurav Vimal

Abstract Romance

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Kumar Gaurav Vimal

Abstract Romance

लड़ता हूँ उससे कभी

लड़ता हूँ उससे कभी

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लड़ता हूँ उस से कभी

कभी उसे मनाने को,

जाता हुं उस से दूर कभी

कभी उसे पास लाने को,


सताता हूँ उसे कभी

कभी उसे हँसाने को,

सुनता नहीं उसकी कभी

कभी उसे सुनाने को,


चाहता हूँ उस से प्यार कभी

कभी प्यार जताने को,

रूठता हूँ उस से कभी

अपनी अहमियत बताने को,

लड़ता हूँ उस से कभी

कभी उसे मनाने को।


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