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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

क्या

क्या

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लोग कहते कितना धन कमायेगा

पूरा दरिया ही क्या घर पर लायेगा


अब भला उन्हें में क्या जवाब दू

अपने ख़्वाबो को क्या में श्राप दू


जितना कर्म करूँगा

उतना ही तो फल पाऊंगा


लोग कहते कितना पैसा बनायेगा

क्या सारी धरती का खजाना घर लायेगा


अब लोगों का मुंह कैसे में बाँध दूँ

अपने बच्चों को कैसे मे कार दूँ


ये दुनिया है,दोस्त

अच्छे को बुरा, बुरे को अच्छा कहती है


लोगों को कहने से क्या सोच को मार दूँ

आगे बढ़ने के रास्ते पर क्या मिट्टी डाल दूँ


लोगों के क्या को क्या में जवाब दूँ

क्या पूरी जिंदगी को विधवा मान लूँ


इस क्या का एक ही जवाब होगा साखी

इस क्या को क्या कहकर ही दिल से निकाल ले।


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