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Prakarm Shridhar

Abstract

3.6  

Prakarm Shridhar

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क्या मैं - क्या तू

क्या मैं - क्या तू

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बहार ए तबस्सुम से वीरानियों ने पूछा बता तेरा वजूद क्या है ,

तबस्सुम ने कहा तेरे गुज़रते वक़्त से ही मेरी शुरुआत है। 


घबरा उठी , झनझना उठी, सुन ये जवाब वीरानियाँ चिल्ला उठी,

मेरा न होना ही तू है तो बता इसमें तेरा क्या है। 


तबस्सुम थोड़ा मुस्करायी थी , थोड़ा घबराई ,

दबे होंठों से उसने कुछ यूँ कहा ,

मेरा न होना तू है , तेरा न होना मैं ,

न मैं तुझसे जुदा हूँ न तू मुझसे जुदा ,

पहलू हैं एक सिक्के के , 

तो क्या सिर्फ मैं हूँ, तो क्या सिर्फ तू है .....................


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