Abhishek Singh
Abstract
कुछ लिखने का,
मन कर रहा है।
कुछ ऐसा जो,
बहुत दर्द भरा हो।
जो पढ़ने वालों की,
आँखों में आॅंसू ला दे।
पर समझ नहीं पा रहा,
ऐसा क्या लिखूँ।
जो मेरे दिल को,
हल्का कर दे।
विश्वास
उसकी चुनरी..!
एक रात दे रहा...
वो जो ख़फ़ा ह...
समुद्र एक कवि...
मेरा कुछ सामा...
एक और दामिनी
जय जवान जय कि...
महामारी
कोरोना वारियर...
फिर बड़े शौक से, विकलांगों का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष मन फिर बड़े शौक से, विकलांगों का अंतर्राष्ट्री...
अगर मेरे पँख होते तो... मैं बादलों पर अपने सपनों का झूला झूलती। अगर मेरे पँख होते तो... मैं बादलों पर अपने सपनों का झूला झूलती।
मैं श्रमिक हूं श्रम के लिए मुझे कारखाना चाहिए। मैं श्रमिक हूं श्रम के लिए मुझे कारखाना चाहिए।
माँ से पूछा करती, तो वो कहती “ तू तो सबकी लाडली है”. माँ से पूछा करती, तो वो कहती “ तू तो सबकी लाडली है”.
स्वयं ही तो न फँसिए भ्रम और जाल में अंतर तो समझिए। स्वयं ही तो न फँसिए भ्रम और जाल में अंतर तो समझिए।
पूरा दिन ऑनलाइन पढो फिर रात को होम वर्क करो. पूरा दिन ऑनलाइन पढो फिर रात को होम वर्क करो.
उसकी चाहत से उसकी जरूरत मै बन गई. उसकी चाहत से उसकी जरूरत मै बन गई.
कब परिवार हम दो पर सिमटा, पता ही नहीं चला। कब परिवार हम दो पर सिमटा, पता ही नहीं चला।
बातें कभी काम की, कभी बेकार की कभी प्यार की, कभी तकरार की बातें कभी काम की, कभी बेकार की कभी प्यार की, कभी तकरार की
ना लगे कोई अपना सा हाथ खुद का थाम ले. ना लगे कोई अपना सा हाथ खुद का थाम ले.
बेटा बनकर लाचार माँ को अपने हाथों भोजन कराया होगा। बेटा बनकर लाचार माँ को अपने हाथों भोजन कराया होगा।
वक्त क़ैद नहीं होता हो जाते हैं हम तुम क़ैद। वक्त क़ैद नहीं होता हो जाते हैं हम तुम क़ैद।
हमसफ़र बनके मेरे, जो आए थे साथ-साथ, वो मेरे अपने ही मुझको जलाकर चले गए। हमसफ़र बनके मेरे, जो आए थे साथ-साथ, वो मेरे अपने ही मुझको जलाकर चले गए।
कहा पत्थर से शिल्पकार ने एक दिन कुछ इस तरह l कहा पत्थर से शिल्पकार ने एक दिन कुछ इस तरह l
कितनी भीड़ व शोर है, कितना बड़ा शहर है। कितनी भीड़ व शोर है, कितना बड़ा शहर है।
आसक्ति का ऐनक लगाएं भटक रहे हो, यह प्यार नहीं। दोनों को पता नहींं। आसक्ति का ऐनक लगाएं भटक रहे हो, यह प्यार नहीं। दोनों को पता नहींं।
कभी भूले से छत पर जो पहुंचे होड़ में अपनी पतंग को ऊंचे ले जाना कभी भूले से छत पर जो पहुंचे होड़ में अपनी पतंग को ऊंचे ले जाना
जब साथ हो कोई ऐसा जो लम्हों सा अनमोल हो. जब साथ हो कोई ऐसा जो लम्हों सा अनमोल हो.
अब गीत गुनगुना पड़ता है गम को भुलाना पड़ता है अब गीत गुनगुना पड़ता है गम को भुलाना पड़ता है
तुम्हारी तांडव लीला से सभी का सुख चैन खोने लगा तुम्हारी तांडव लीला से सभी का सुख चैन खोने लगा