STORYMIRROR

VIVEK ROUSHAN

Abstract

1.0  

VIVEK ROUSHAN

Abstract

क्या किया जाए

क्या किया जाए

1 min
115

कोई अपना जब सताए तो क्या किया जाए

दर्द दिल  का  बढ़ाए  तो क्या किया जाए


इक बाग़ के किसी फूल की हिफाजत आप करो

वही  फूल मुरझा जाए तो क्या किया जाए


जो कहे की इस भीड़ में वो है सबसे अलग

वही जब नज़र चुराए तो क्या किया जाए


उसे मालूम हो आप के दिल की हकीकत 

फिर भी वो पास न आए तो क्या किया जाए


जैसे-तैसे चल रहा है अपने सफर में " रौशन "

हर गम पर कदम लड़खड़ाए तो क्या किया जाए



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract