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Jyothilaxmi lolam

Romance

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Jyothilaxmi lolam

Romance

"क्या कीजिए"

"क्या कीजिए"

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दिल से मजबूर हैं, क्या कीजिए

गुज़रा वक़्त अब भी महफ़ूज़ है, क्या कीजिए

तेरी बेवफ़ाई,अभी भी इश्क़ बनकर महक रही है

मेरी साँसों में… क्या कीजिए।



तू आज भी ख्वाबों का राह़ी है,

हर रात मेरी आँखों में रुबूरू है, क्या कीजिए


भुलाने चले थे तुझे हर साज़ पर,

तेरी आवाज़ ही हर सुर में थी, क्या कीजिए


कितनी दफ़ा जला दिए तेरे ख़त, तेरी तसवीरें,

पर राख में भी तेरा नाम लिखा था, क्या कीजिए


लोग कहते हैं इश्क़ मिट जाता है वक़्त के साथ,

वो वक़्त ही ठहर गया है तुझ पर, क्या कीजिए


अब ना शिकवा, ना कोई आरज़ू बाक़ी,

मगर ये दिल तुझसे ही वफ़ा करता है, क्या कीजिए



तू आज भी,हर मौसम की यादों में ज़िंदा है —धूप की सुनहरी किरणों में
तेरा खिलता हुआ चेहरा नज़र आता है।

जाड़े का ये कोहरा,
तेरी बाहों में बिताए लम्हों की चादर ओढ़ लाता है,
क्या कीजिए।


बारिश की बूँदें

तेरे आने की सौग़ात बनकर बरसती हैं,
क्या कीजिए।

दिल से मजबूर हैं, क्या कीजिए,

गुज़रा वक़्त अब भी महफ़ूज़ है, क्या कीजिए


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