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ritesh deo

Abstract

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ritesh deo

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कविता

कविता

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मन के अंतरंग कोनों से 

छन छन कर आती भावनाएं

रचती है कविताएं 

वहाॅं न चेहरा होता है 

और न ही पहचान 

वहाॅं बस प्रेम होता है 

अपनी संपूर्णता लिए हुए !

सुंदरता

सादगी

समर्पण

ख़ुशी

सबका वहाॅं एक ही रूप होता है

और वो है

अपने अस्तित्व का एकाकार !!

   


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