कविता
कविता
मन के अंतरंग कोनों से
छन छन कर आती भावनाएं
रचती है कविताएं
वहाॅं न चेहरा होता है
और न ही पहचान
वहाॅं बस प्रेम होता है
अपनी संपूर्णता लिए हुए !
सुंदरता
सादगी
समर्पण
ख़ुशी
सबका वहाॅं एक ही रूप होता है
और वो है
अपने अस्तित्व का एकाकार !!
