STORYMIRROR

Monali Kirane

Inspirational

4  

Monali Kirane

Inspirational

कुदरत के आंसू

कुदरत के आंसू

1 min
253

इन्सान निचोडे कुदरत को गुस्सेका सैलाब आया है

खुदगर्जी भरे कई कामों का हम ने ये नतिजा पाया है ! 


बारिश के आंसूं थमते नही या सिसक् रों रहा धरती का दिल

कही धधक रही हरीयाली है इन सबसे हो रहा क्या हासिल ?


दे दे के चवन्नी लुटा रहे नायाब तिलस्मी खजाने को

आगाज प्रलय की दे सी रही धरती माँ हम इन्सानों को !


अपने दो गज़ के घरोंदे को दिलजान लगाके संवारे हम

गर समझे जहॉं को ही घर सा और उसें बचाने उठाए कदम।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational