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Rozy Kumari

Classics Inspirational Others

3.5  

Rozy Kumari

Classics Inspirational Others

कुछ तो कहना चाहती हूं मैं

कुछ तो कहना चाहती हूं मैं

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  1. एक शाम लिखूं कुछ अपने ऊपर, क्या कुछ कहना चाहती हूं मैं,,,,
क्या सोच के मुस्काती हु, क्या सोच के मैं गाती हूं,,,,,
कुछ तो कहना चाहती हूं मैं, पर कुछ न कह पाती हूं मैं,,,,,
यही सोच- सोच घबराती हुं मैं, कुछ तो कहना चाहती हूं मैं,,,,
क्या लिखूं अपने मैं ऊपर, यही सोच घबराती हुं मैं,,,
इसलिए कुछ नहीं कह पाती हूं मैं, कुछ तो कहना चाहती हूं मैं,,,
अपने ऊपर यही लिखूंगी कि लड़की होना आसान नहीं,,,
लोग कुछ पाते हैं, खुश होते हैं,, कुछ खोते है तो रोते हैं,,,
मैं  सब कुछ खोकर भी खुश रह जाती हूं,,, कुछ तो कहना चाहती हूं मैं,,पर कुछ नहीं कह पाती हूं मैं,,,,,


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