STORYMIRROR

Rozy Kumari

Children Stories Classics Inspirational

4.2  

Rozy Kumari

Children Stories Classics Inspirational

बहन

बहन

1 min
3

बहन मैं अपनी बहनों के बारे में क्या लिखूँ, वो रेगिस्तान में भी सागर जैसी है, धूप में भी बादल जैसी है। समतल में भी पहाड़ जैसी है, हिम्मत, हौंसला मेरी पहचान जैसी है।जो मेरी खुशी को जान लेती है, जो मेरे दुख, दर्द, तकलीफ को भी भाँप लेती है। मेरे हँसने पर हँस लेती है, मेरे रोने पर मुझसे ज्यादा ही रोने लगती है।अपनी बातें तो करती नहीं, बस मुझसे ही मेरी बातें पूछने में लगी रहती है। सबकुछ अपना छुपा कर, फिर भी मुझे हँसा देती है।मेरी बड़ी-सी-बड़ी गलतियों को हमेशा नज़रअंदाज कर देती है, जो सबके लिए ज़ुल्म है, उनके लिए तो सिर्फ एक नादानियाँ है।मैं एक बार रूठ जाऊँ तो वो सौ बार मनाती है। मैं एक बार न बोलूँ तो सौ बार जवाब माँगती है। जो मेरे बेकार सवालों का भी एक-एक जवाब देती है। मैं सुनाती हूँ और वो सबकुछ अच्छे से सुनती है, मेरी बातों से कभी उकताती नहीं है।जो मेरे साथ मेरे साया के तरह रहती है। सच कहा है किसी ने "बहन" भी माँ से कहाँ कम होती है। उनके बारे में जितना लिखूँ वो कम है, बहन माँ से ज़रा भी नहीं कम है।


Rate this content
Log in