STORYMIRROR

Garima Mishra

Abstract

3  

Garima Mishra

Abstract

कुछ रिश्ते

कुछ रिश्ते

1 min
315

बोलना पड़े जहाँ सोचकर

चले चलो उस रिश्ते को तोड़कर


जहाँ जज़्बात समझे जाएं बातों को तोलकर

आगे बढ़ो ना उन्हें अलविदा बोलकर


बोलो ना अपनी बातों को दिल खोलकर

क्या बिगाड़ लेंगे लोग, तुम्हे बुरा बोलकर


छोड़ो ना लोगों को

जाने दो जिसे जाना है साथ छोड़कर


अगर आना होगा किसी को

तो वक्त लाएगा उन्हें, उनका रुख़ मोड़कर


जहाँ जज़्बात समझे जाए बातों को तोलकर

आगे बढ़ो ना उन्हें अलविदा बोलकर।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract