कुछ लोग
कुछ लोग
जब भी हम कुछ नया करते हैं ,
जब भी हम कुछ अलग हटकर एक नई पहल की शुरूआत करते हैं ।
तो न जाने क्यों कुछ लोग हमें हतोत्साहित करते हैं ?
कभी वो कहेंगे क्या कर रहे हो ये सब ?
सब बकवास है ! ये सब फिजूल है l।
पहले खुद को देखो तब दुनिया को देखना ।
कभी - कभी नेपथ्य में खुद को निहारता हूँ तो पाता हूँ कि कहीं वे लोग ठीक ही कह रहे हैं !
लेकिन फिर जब उन प्रतिभावान लेकिन अवसर से वंचित विद्यार्थियों पे नज़र पड़ती है ,
तो हमें खुद की भूल का एहसास होता है ।
और हम उन कुछ लोगों की परवाह किये बिना अपने साथियों के साथ एक नई जोश से अपने कर्त्तव्यपथ की ओर अग्रसर हो जाता हूँ ।
