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usha shukla

Abstract

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usha shukla

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कुछ बातें किया करो

कुछ बातें किया करो

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हमेशा कहती हूँ,

कुछ बातें किया करो।

हर बार खामोशी, 

अच्छी नहीं लगती।

बातों से ही बात निकलती है।


बात के कोई पैर नहीं होते, 

बात के कोई पंख भी नहीं होते।

फिर भी बात, पूरी दुनिया में राज करती है।

पूरी दुनिया में सफर करती है।

अरे बात ही तो है, 

जो हर प्रेमी जोड़े के प्रेम को 

प्रगाढ़ करती है।

बात ही तो है, 

जो नेता को राज नेता बना देती है।


बात ही तो है , 

जो सिंहासन पर बैठा देती है।

और बात ही तो है , 

जो फलक से जमीन पर ले आती है।

बात ही तो है , 

जिसकी वजह से कृष्ण पांडव के साथ युद्ध में थे।


बात ही हुई थी , 

जब अंग्रेजों ने हमारे देश पर, 

इतने साल राज किया।

और बात ही हुई थी, 

जब देश के वीरों ने, 

अंग्रेजों को खदेड़ा।


बात ही हुई थी, 

जिसने देश के टुकड़े करवा दिए।

बात ही तो होती है, 

जब कोई वीर देश के लिए समर्पित होता है।

यह बात ही ऐसी हो जाती है, 

जब समाज में कोई खुशी होता है, 

तो कोई टूट जाता है।


"कर लिया करो तुम भी बात" 

क्या पता तुम्हारी बात से हमारे प्यार को, 

एक नया आकाश मिल जाए।

कर लिया करो तुम भी बात ........ 


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