STORYMIRROR

Vinita Shukla

Inspirational

4  

Vinita Shukla

Inspirational

कुछ ऐसा आवाहन करो

कुछ ऐसा आवाहन करो

1 min
428

सुषुप्त राष्ट्र चेतना

उठो कोई जतन करो

असंख्य दीप जल उठें

कुछ ऐसा आवाहन करो


1– धधक रहा है देश

वैमनस्य के प्रमाद से

जाति धर्म आस्था

के नाम हर विवाद से

जो भारती के लाल हो–

तो द्वेष का शमन करो

असंख्य दीप……………………


2– डरी हुई दिशाएँ हैं

उदास है चमन चमन

नृशंस रक्तपात से–

सहम रहे धरा गगन

कपालिनी की सौं उठा

शत्रु का दमन करो

असंख्य दीप………………………


3– फंसा हुआ समाज ये

अनीतियों के जाल में

भ्रष्ट कदाचारियों के 

नित नये बवाल में

अवाम की पुकार पे

निसार हर सपन करो

असंख्य……………………………


4– सेंध लग चुकी है जो

हमारे संविधान में–

असंख्य छिद्र हो चले हैं

न्याय के वितान में

सच को आत्मसात कर

असत्य को दफन करो

असंख्य…………………


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational