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Vinita Shukla

Others

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Vinita Shukla

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कभी न कभी जीवन में आता बसंत

कभी न कभी जीवन में आता बसंत

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कभी न कभी जीवन में आता बसंत 

 मन की वादी में

 फूलों सा विस्तार 

 हर दिन हर लम्हा

 खुशियों का त्योहार 

खुली हुई ऑंखों में अनदेखे सपने

खिलखिलाहटों में तरंगित उमंग

कभी न कभी.............

  कहीं न कहीं, जीवन में

   खिलता है कुंज

 छितराती जाती उदासियों की धुंध 

 शैशव की परीकथा जैसी अनुगूंज 

   सीपी जो पा जाए,

   स्वाती की बूंद 

   बज उठे अनुभूतियों में

  कोई जलतरंग

   कभी..................



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