Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Preeti Sharma "ASEEM"

Abstract


3  

Preeti Sharma "ASEEM"

Abstract


कृष्ण तुम

कृष्ण तुम

1 min 13 1 min 13


कृष्ण तुम,

प्रेम की पुकार हो।

इस धरा पर,

चातक मन की,

करुण प्रिय पुकार हो।

कृष्ण तुम..

प्रेम की सुर -ताल हो।

इस धरा पे,

नफरतों का कोहराम है।

प्रेम को मिटाने ,

तत्पर हर इंसान है।

झूठ -फरेब को ,

प्रेम का बस नाम देकर।

फिल्मी धुन -सा,

मतलब से बदल जाता प्यार है।

तुम एक सच्चे प्रेमी के,

चित -चोर हो।

कृष्ण तुम,

 प्रेम की पुकार हो।

इस धरा की,

असंख्य राधिकाओं के प्राण हो।

जीवन की चक्की में,

पिसती भावनाओं के त्राण हो।

कृष्ण तुम...

सच्चे प्रेम का मान हो।

इस धरा पे,

गंगा -यमुना के तटों पर बैठी।

असंख्य मीराओं की,

करूण चितकार हो।

कृष्ण तुम....

प्रेम की अमिट आस हो।

कृष्ण तुम...

प्रेम की अमर प्यास हो।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Preeti Sharma "ASEEM"

Similar hindi poem from Abstract