कोई साथ नहीं तो क्या हुआ!
कोई साथ नहीं तो क्या हुआ!
कोई साथ नहीं तो क्या हुआ,
उगते सूरज के साथ कौन होता है?
फिर भी वो चमकता है,
फिर भी वो रोशनी लुटाता है।
कोई नज़रअंदाज़ करे तुम्हें तो क्या हुआ,
सूरज उगता है, जब दुनिया सो रही होती है।
हाँ! जब उसकी किरणें गिरती हैं,
तो हर कोई जाग ही जाता है, चाहे ना चाहे।
कोई साथ नहीं तो क्या हुआ,
साथ उम्मीदें होनी चाहिए।
लौ छोटी सी भी अंधेरे को चीर देती है,
खुद जलती है, दूसरों से नहीं, तभी चमकती है।
कोई साथ नहीं तो क्या हुआ,
डर तो साथ नहीं है ना?
जो तुम अकेला चलने से न डरोगे,
तभी तो इतिहास का कोई पन्ना लिखोगे।
कोई साथ नहीं तो क्या हुआ,
नए ideas तो दिमाग के साथ हैं।
कोई नई सोच, कोई नया कदम,
अकेले दुनिया बदलने के लिए काफी हैं।
कोई साथ नहीं तो क्या हुआ,
भरोसा खुद के साथ होना चाहिए, doubt नहीं।
खुद पर यकीन हो तो रास्ते खुद दिखाई दे जाते हैं,
बैठ जाती हैं मुश्किलें घुटनों के बल।
सुनो मगर,
अगर कोई तुम्हें सर्कस का शेर बनाना चाहे,
अपने इशारों पर नचाना चाहे,
तो याद रखना-
अपने को तो जंगल का शेर ही बनना है।
तब, कोई साथ न भी हो,
तो भी दुनिया तुम्हें सलाम करेगी।
जानते ही ना,
सूरज जब चमकता है, तब सारा आकाश उसका होता है।
और एक बात,
सच तो यह है कि,
कोई किसी के साथ नहीं होता,
लोग खुद के लिए साथ ढूंढते हैं।
तो फिर क्यों ना,
हमें भी कोई ढूंढे।
