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Piyosh Ggoel

Abstract

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Piyosh Ggoel

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कितनी सुंदर मौत

कितनी सुंदर मौत

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एक ऐसा विषय जिसके बारे में लोग बात नही करते

यह एक ऐसा विषय है जिसके नाम से लोग है डरते

पर सच यही है कि भुजनी है एक दिन जीवन की ज्योत

आओ आज तुम्हे समझाऊ की कितनी सुंदर है मौत


दुनिया की चिंता छोड़कर इंसान चैन से सो जाता है

इस दुनिया को छोड़ अलग दुनिया का हो जाता है

जब इंसान उसे बनाने वाले खुदा में ही रम जाता है

वो दिन होता कितना सुंदर जब इंसान तारा बन जाता है


जो कभी बात न करते थे , वो भी गले लगा लेते है

उस दिन तो पराए भी अपनेपन का एहसास जगा देते है

भरी महफ़िल में जो लोग साथ खड़े होने में शरमाते थे

मौत वाले दिन तो वो भो नीर बहाते है


उस दिन मातम की चादर में लिपटा आंगन होता है

जिस दिन अर्थी पर बहना का भाई , सजनी का साजन होता है

बेटे को उस दिन अपनी जिम्मेदारी का एहसास होता है

युग परिवर्तन होता परिजन के लिए , वो दिन बड़ा खास होता है


मित्र - सखा याद करे अपनी की हुई नादानियों को

रो - रो कर याद करे अपनी शैतानियों को

ये मौत ही है जिसने सारे गीले शिकवों को भुला दिया

इस मौत ने ही अरसे बाद सब मित्रो को मिला दिया


आज परिजन , सखा सब बैठे साथ है

आंखों में खारा पानी नही , बहते हुए जज्बात है

इन आसुओ की बूंदों की सागर से ज्यादा गहराई है

पर इन सबसे बेखबर वो चैन से सो रहा जिसकी मौत आई है


सो रहा है जो कफ़न की चादर ओढ़कर

जा चुका है जो अपने सारे रिश्ते नाते तोड़कर

उसे कुछ खबर नही , वो सब कुछ ही भूल गया है

जब से मौत की गोदी का झूला झूल गया है


मौत वाले दिन इंसान सारे चिंताओं से मुक्ति पा जाता है

जीवन के सफर का अंत सबसे सुंदर अंत कहलाता है

एक सफर का अंत ओर एक सफर की शुरुआत होती है

पीड़ा भरे दिन के बाद वो सुहानी रात होती है।


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