STORYMIRROR

कितनी अपनी लगने लगी हो तुम

कितनी अपनी लगने लगी हो तुम

1 min
322


उजले सफ़ेद,

कागज़ पर,

लिखता हूँ,

तुम्हारा नाम।


एक बार,

फिर एक बार।


एक बार और,

बहुत करीब,

कितनी अपनी लगने,

लगी हो तुम।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama