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Jalpa lalani 'Zoya'

Abstract Inspirational

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Jalpa lalani 'Zoya'

Abstract Inspirational

किताब-ए-ज़ीस्त

किताब-ए-ज़ीस्त

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किताब-ए-ज़ीस्त  के  असरार खुल  रहे  हैं,

हर पन्ने पर कहानी के किरदार बदल रहे हैं।


खुशी  की स्याही  से  लिखी हैं  कुछ इबारत,

तो कोई कागज़ ग़म-ए-हयात से जल रहे हैं।


पीले  ज़र्द  पन्ने की कोने में पड़ी है सिसकती,

राज़ बेपर्दा होते ही हर इक सफ़ा मसल रहे हैं।



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