STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

4  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

किसी को दुख नही देना चाहिये

किसी को दुख नही देना चाहिये

1 min
25

किसी को दुःख नही देना

चाहियेहंसकर सब दुःख सहना चाहिये

कोई मारे तुम पर शब्दो के पत्थर,

तुम्हे गुलाब का सुमन होना चाहिये

ये दुनिया बहुत ही अजीबोगरीब है

दुःख देती है उन्हे जो सच्चे पीर है

पर दलदल में कमल उगना चाहिये

किसी को दुःख नही देना चाहिए

जब-जब भी कोई तुमसे बैर करे,

बिना-बात वो जिंदगी जहर करे,

ऐसे लोगो पे रहम नही करना चाहिये

बुराई की ईंट का जवाब सदा ही,

सच्चाई के पत्थर से देना चाहिये

किसी को दुःख नही देना चाहिये

हिंसा भले आप किसी पे मत करो,

पर वक्त-वक्त पे फुंफकारना चाहिये

सीधा होना ये बहुत अच्छी बात है,

पर कोई तुम्हे दबाये ये बुरी बात है,

टेढ़ी उँगली से भी घी निकालना चाहिये

जैसा ज़माना है,

वैसा साखी तुम बनो,

राम नही आज के समय कृष्ण बनो

,बुराई के प्रतीक हर दानव पर,

सत्य का सुदर्शन चलाना चाहिये

किसी को दुःख नही देना चाहिये


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational