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SANJAY MARANDI(KUNAL)

Romance

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SANJAY MARANDI(KUNAL)

Romance

किस मोड़ पर

किस मोड़ पर

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राह में निकला हूं

धुंधली सी आस अब लिए,

मंजिल का पता नहीं

पर कदम बढ़ चले,

उम्मीद की किरणों में

यह दुनिया टिकी है,

नजरों का यह पैमाना,

अब तक हमको न दिखी है।

झूठे आस को लिए हम

घर से तो निकले हैं,

टूटे प्यार तलाश में

हम फिर से निकले हैं,

राहों के इस चौराहे में

कदम किधर बढ़ाऊं,

इस रास्ते को चुनुं,

या उस रास्ते पर चलूं,

मुझे अब भी पता नहीं है।

मैं किस राह को चलूं,

एक टक में रुकूं,

दूर तक नजरों को फेरूं,

फिर वही आस के शमा लिए,

अपने कदम लिए आगे को बढ़ूं!

मिल जाओगी मुझे तुम,

ऐसा मेरा मानना है,

मना ही लूंगा तुम्हें मैं,

ऐसा मैंने ठाना है।

अब भी तुम इस नजरों से ओझल हो,

हार ना मानूंगा मैं बढ़ता चलूंगा,

जब तक ना तुम्हें पालूं,

मैं ना रुकूंगा,

मैं ना झुकूंगा,

इस राह में कदम लिए,

मैं चलता रहूंगा,

मैं बढ़ता रहूंगा।।


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