STORYMIRROR

सुरशक्ति गुप्ता

Abstract

2  

सुरशक्ति गुप्ता

Abstract

ख्वाहिशें

ख्वाहिशें

1 min
140

वक्त बेवक्त की बेहिसाब कोशिशें

कुछ चुनिन्दा ख्वाब 

और उन्हें न पा सकने की ख्वाहिशें......

कांच के टुकड़ों की तरह बिखर रहे हैं।।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract