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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

ख़्वाबों का घर

ख़्वाबों का घर

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हमारा घर आलू की टिक्की से,

नल टूटी गोल गप्पे के पानी से।


चाय पीना सुबह-शाम रोज़ ही,

ऐसा ख़्वाबों का घर चाहते हम।


आम-पापड़ के पेड़ चारों तरफ़,

पिज़्ज़ा बर्गर दही भल्ले संग में।


चॉकलेट और काजू कतली ही,

साथ में कॉफ़ी कोल्ड रोज़ पीते।


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