STORYMIRROR

दिनेश कुमार कीर

Tragedy Action Fantasy

3  

दिनेश कुमार कीर

Tragedy Action Fantasy

ख्वाब

ख्वाब

1 min
11

ख्वाब सिमटे जो मुट्ठी में छूट ही जाएंगे 

एक दिन 


बनकर बैठे जो अपने रूठ ही जाएंगे 

एक दिन


मोहब्बत ख्वाब सी उसकी वादे कांच से

 नाज़ुक 

हिफाजत कितनी भी कर लूं टूट ही जाएंगे 

एक दिन।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy