खो गया हूं मैं लेखक बनकर
खो गया हूं मैं लेखक बनकर
दिया जल गया , रात होने को हो गई
मैं रह गया, एक बात कहने को कहीं गई
छुप जाता हूं , नदी बनकर समुंदर में
मैं बंद हो गया, एक बात सुनने को कहीं गई
जो नहीं था , वो बन गया था मैं
मैं छुप गया, एक बार ढूंढने की ख्वाईश रखी गई
किताबों में मेरा घर था, सो भीगना भी आसान था
मैं बस गया, एक छोटी सी किराये की बात रखी गई
चल रहा हूं मैं , एक कलम बनकर
मैं रुक गया, एक मुझसे कभी खत्म न हो ऐसी किताब लिखने को गई
ढूंढ रहा हूं मैं, एक जुगनू बनकर
मैं बुझ गया, एक मुझसे अपनी परछाईं खोजने को कहीं गई
खो गया हूं मैं, एक शायर बनकर
मैं भूल गया, एक कलम मुझको अनजान बना गई
सो गया हूं मैं, एक ख्वाब बनकर
मैं राजदीप बन गया, मुझे अपनी मां की गोद में आंख लग गई।
