Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Birendra Lodhi

Classics


2  

Birendra Lodhi

Classics


कहीं खो सा गया हूँ

कहीं खो सा गया हूँ

1 min 321 1 min 321

कहीं खो सा गया हूँ

ख्वाबों में डूब सा गया हूँ 

न सुनता हूँ दिल की

न समझाइस देता हूँ

कुछ ख्याब है मेरे।


जो उन ख्वाबों को

मुकम्मल करने में लगा हूँ,

कुछ बातें है जो अटपटी सी

लगने लगी है।


कुछ लोग अटपटे से

लगने लगे हैं।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Birendra Lodhi

Similar hindi poem from Classics