Birendra Lodhi
Classics
कहीं खो सा गया हूँ
ख्वाबों में डूब सा गया हूँ
न सुनता हूँ दिल की
न समझाइस देता हूँ
कुछ ख्याब है मेरे।
जो उन ख्वाबों को
मुकम्मल करने में लगा हूँ,
कुछ बातें है जो अटपटी सी
लगने लगी है।
कुछ लोग अटपटे से
लगने लगे हैं।
कितनी रागिनिय...
कहीं खो सा गय...
चला जाऊँगा ते...
राह
कई बार संभाला होगा तुमने खुद को, समर्पण के दिल तुम्हारा भी तरसा होगा। कई बार संभाला होगा तुमने खुद को, समर्पण के दिल तुम्हारा भी तरसा होगा।
विडंबना तो देखो उनसे ही "भले की आस" लगाये बैठे हैं। विडंबना तो देखो उनसे ही "भले की आस" लगाये बैठे हैं।
पाँच पतियों वाली का कटाक्ष, बना द्रोपदी का उपहास, पाँच पतियों वाली का कटाक्ष, बना द्रोपदी का उपहास,
संरचना हुई महाकाव्य की, उपमा कालिदास की विशिष्ट हुई। संरचना हुई महाकाव्य की, उपमा कालिदास की विशिष्ट हुई।
गुजिया मिठाई साथ में चखने को लाई है कृष्णा प्रियतमा गुजिया मिठाई साथ में चखने को लाई है कृष्णा प्रियतमा
आखिरी दिन साँसों की डोर टूटने तक है जिंदगी। आखिरी दिन साँसों की डोर टूटने तक है जिंदगी।
तुम क्या जानों दर्द के दरख़्त से मिलकर गले, तुम्हारी यादों में मैं कितना रोई... तुम क्या जानों दर्द के दरख़्त से मिलकर गले, तुम्हारी यादों में मैं कितना रोई...
उसको महफ़िल में रुसवा करता है, कपड़े तो दोनों ने उतारे थे मोहब्बत में ? उसको महफ़िल में रुसवा करता है, कपड़े तो दोनों ने उतारे थे मोहब्बत में ?
हम भी आधी दुनिया है, यह काफी है, बताने के लिये। हम भी आधी दुनिया है, यह काफी है, बताने के लिये।
खुद नारायण जन्मे कौशल्या की कोख से। खुद नारायण जन्मे कौशल्या की कोख से।
बढ़ेगा देश उनसे ही जो, श्रम सुबह से शाम करते हैं। बढ़ेगा देश उनसे ही जो, श्रम सुबह से शाम करते हैं।
और कुछ दिल नहीं चाहता है 'अवि', हो जिगर में बसा अक्स जब राम का। और कुछ दिल नहीं चाहता है 'अवि', हो जिगर में बसा अक्स जब राम का।
इसके आने से धरती भी, रोशन हो जाती है।। इसके आने से धरती भी, रोशन हो जाती है।।
आओ हम सब एक जुट हो जाए देश को फिर से राम जी के पास लाए। आओ हम सब एक जुट हो जाए देश को फिर से राम जी के पास लाए।
बारह साल वनवास पूर्ण कर एक साल अज्ञातवास रह। बारह साल वनवास पूर्ण कर एक साल अज्ञातवास रह।
असल में तो मन से ना कभी तुम दूर हुए और ना कभी हम तो दूर गए। असल में तो मन से ना कभी तुम दूर हुए और ना कभी हम तो दूर गए।
मैं मजदूरी करता रहता मुझसे अब बतियाये कौन। मैं मजदूरी करता रहता मुझसे अब बतियाये कौन।
नारी का हर रूप अनोखा होता है नारी एक संरचना होती है।। नारी का हर रूप अनोखा होता है नारी एक संरचना होती है।।
फिर भी मंजिलों से कोई मुकम्मल हुआ हैं क्या ? फिर भी मंजिलों से कोई मुकम्मल हुआ हैं क्या ?
जीने का जगाया है अहसास खुल के मन के भीतर झांकने का रास्ता दिखा के। जीने का जगाया है अहसास खुल के मन के भीतर झांकने का रास्ता दिखा के।